निबंध - समाचार पत्र | Newspaper
(1) प्रस्तावना
सुबह एक समाचार पत्र और एक चाय का कप हमारे दिन
को एक अच्छी शुरुआत देता है। हम जान पाते हैं की क्या हुआ और क्या होने वाला है
दुनिया में, हमारे
देश में, हमारे
समाज में। समाचार पत्र लोगों में सूचना का सबसे प्रसिद्ध माध्यम है। यह आसानी से
कहीं भी हर भाषा में उपलब्ध है और बिलकुल समाचार पत्र समाज के हर वर्ग के बीच आम
है। इस उच्चतम तकनीकी के युग में भी समाचार पत्र ने अपनी पहचान नहीं खोयी है।
समाचार पत्र प्रिंट मीडिया के अंतर्गत आता है।
(2) इतिहास
दुनिया का पहला ज्ञात समाचार पत्र 59 ई.पू. में रोम में
जूलियस सीज़र ने चलाया था ताकि जनता को सामजिक और राजनैतिक घटनाओं से अवगत कराया जा
सके। इसका नाम ‘एक्टा डेउरना’ था। पूर्व में यह धातु व पत्थरों पर उकेरा जाता था
और कुछ विशेष नगरों तक ही सीमित था। अब तो यह डिजिटल रूप में आपके मोबाइल पर भी
उपलब्ध है। समाचार पत्र का इतिहास बहुत ही विस्तृत एवं रोचक है। जानकारी देने के
साथ-साथ समाचार पत्र ने भारत देश की स्वतंत्रता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(3) महत्व
समाचार पत्र हमारे जीवन का अभिन्न और महत्वपूर्ण
अंग है। यह संदेशवाहक है, यह उद्घोषक है, यह ज्ञान स्रोत है, यह प्रसारक है और यह जनजाग्रति का सशक्त
माध्यम भी है। यह सामाजिक व राजनैतिक ही नहीं बल्कि समस्त संसार में घट रही घटनाओं
की जानकारी देता है। ख़बरों के साथ-साथ यह विज्ञापन का भी माध्यम है। इसमें वस्तुओं,
सेवाओं और भर्तियों
के विज्ञापन प्रसारित किये जाते हैं। इसमें गुमशुदा, खोया-पाया और सरकारी विज्ञप्तियाँ भी
सम्मिलित हैं। समाचार पत्र के द्वारा हम अपने आस-पास की सभी घटनाओं से अवगत रहते
हैं।
(4) कमियाँ
जहाँ एक तरफ समाचार पत्र के कईं फायदे हैं तो
दूसरी तरफ कुछ कमियाँ भी हैं। कभी-कभी समाचार पत्र अपनी साख बढ़ने के लिए झूठी और
पुरानी ख़बरों का सहारा लेते हैं। हालाँकि लोगों को समाचार पत्र के लिए मासिक शुल्क
देना होता है लेकिन समाचार पत्रों की आय का मुख्य माध्यम विज्ञापन होते हैं। इसके
कारण समाचार पत्र बिना सत्यता की जाँच किये विज्ञापन छाप देते हैं और पाठकों से
विवेक से काम लेने का कहकर समाचार पत्र दोषमुक्त भी हो जाते हैं। इसके कारण
जनसाधारण को कभी-कभी भारी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है।
(5) उपसंहार
समाचार पत्र के बिना हमारा सम्पर्क दुनिया से कट
जायेगा। बेशक, समाचारपत्र
केवल जानकारी और विज्ञापन का ही नहीं बल्कि अपने विचारों को व्यक्त करने और उन
विचारों को दुनिया तक पहुँचाने का सशक्त और सर्वव्याप्त माध्यम है। समाचार पत्र
सभी को पढ़ना चाहिए आम जनता को भी और उन्हें भी जो कहते हैं “हमें अब तक इस बात की
जानकारी नहीं थी, हम जल्द
ही कार्यवाही करेंगे।” इसके साथ समाचारपत्र के द्वारा केवल होली और दिवाली नहीं
बल्कि पूरे साल ही प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के लिए जन साधारण को प्रेरित
करते रहना चाहिए।
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